Tuesday, June 24, 2014

शिवस्तुति

शिवस्तुति 


सूर्य तेजो चँन्द्र शेखर,
चारु कुण्डल सोमेश्वरा । 
निर्विकार समाधि देवो ,
गौरीनाथ योगेश्वरा । 

कालातीत गुणी गुणेश्वर,
सर्वव्यापी परमेश्वरा । 
ध्यानदीप ध्युतीधारा,
देवादि देव महेश्वरा । 

दीप वेद
June, 24 2014 
vdeep27@gmail.com



शब्दावली :
 चारु: beautiful, graceful and pure
 कालातीत: beyond time
 ध्युतीधारा = ध्युती (splendor) +  धारा (stream) = Lord Of Brilliance



Sunday, June 8, 2014

निशब्द

निशब्द 

क्या बोलूँ क्या जानू  मैं ,
मन को क्या पहचानू मैं । 
शब्दों के आलिंगन मे ,
विचारों को क्यों बांधू मैं । 

माधव ने क्या बोली गीता ,
साधक ने क्या तोली गीता । 
कुरुक्षेत्र की भूमि पर ,
किस किस की हमजोली गीता । 

मौन के अधरों की जिज्ञासा ,
शब्दों मे क्यों बाँधूँ मैं । 
क्या बोलूँ क्या जानू  मैं ,
मन को क्या पहचानू मैं । 




शब्दावली:
आलिंगन - Hug
अधरों- lips
जिज्ञासा - curiosity
 




Saturday, May 31, 2014

मुक्ति

मुक्ति 

मुक्ति के तट पर सँजोया 
स्वप्न घृत दीपक,
माया आलिङ्गित बयार 
रक्त सिंचित नर्क मदमय ।

मनु सन्तति विकार मनमें 
काया मद और लोभ तन्मे,
भक्ति पोषित दम्भनीड़ मे 
प्राण दीपक किस्लय । 



शब्दावली  :
 घृत - घी
सन्तति - पुत्र/वंश (decedents)
नीड़ - Nest
किस्लय - Bud

Sunday, April 6, 2014

ख्वाइशें

क्यों वक्त का बहाना बनाते हो
जब यहाँ सब आपने ही तो हैं
कुछ ख्वाइशें यूं ही पूरी हो जाएंगी
बस मुट्ठी से कुछ पल खोल दे
दिन का वाज़िब इस्तेमाल तो सब कर ही लेंगे
पर तम्मनाओं की ख्वाइशें कहीं अधूरी न रह जाएँ

Wednesday, March 26, 2014

बढे चलो


वीर तुम बढे चलो ,
धीर तुम बढ़े चलो ।
निशब्द क्रांति ठौर है,
जन्म मृत्यु गौड़ है ।

पथ पे शूल हों बड़े
डरें नहीं हटे नहीं
भय भाव मौन हैं
झुके नहीं हिलें नहीं ।



तू सोचता क्यों हश्र का
ज्ञान नहीं केवल चक्ष् का
जो मन से उठे नेत्र हैं
दर्शाते कुरुक्षेत्र हैं

तू बीज है श्रेस्ठ का
न क्लेश का न द्वेष का
वो चारु मन का तेज है
तू आप ही शर्वश्रेष्ठ है

निशब्द क्रांति ठौर है,
जन्म मृत्यु गौड़ है ।










Thursday, January 16, 2014

परिचय


तुम मुझ में हो मैं तुम में हूँ
फिर तुम से मेरा परिचय क्या ।

पत्तों कि पगडंडि तुम तो सलिल कणो की ओस हूँ मैं ,
व्योम अगर तो दिशांत हूँ मैं
सूर्य अगर तो निशांत हूँ मैं ,
तुझ को हो क्यों गर्व विभा का
जब अरुणिमा की तान हूँ मैं ।

तुम मुझ में हो मैं तुम में हूँ
फिर तुम से मेरा परिचय क्या ।

दर्पण में प्रतिबिम्ब , प्राणो में स्मृति
आँखों में मौन के शब्दों कि गति
सिमटे हुए अधरों पर सिसकती सि हंसी
और करूँ जग में मैं सञ्चय क्या

तुम मुझ में हो मैं तुम में हूँ
फिर तुम से मेरा परिचय क्या

Monday, December 30, 2013

politique: 2013 India

politique: 2013 India: The year of 2013 brought many stories some of which will be part of  history and others will fade away from memories. On one side it was na...