Saturday, May 31, 2014

मुक्ति

मुक्ति 

मुक्ति के तट पर सँजोया 
स्वप्न घृत दीपक,
माया आलिङ्गित बयार 
रक्त सिंचित नर्क मदमय ।

मनु सन्तति विकार मनमें 
काया मद और लोभ तन्मे,
भक्ति पोषित दम्भनीड़ मे 
प्राण दीपक किस्लय । 



शब्दावली  :
 घृत - घी
सन्तति - पुत्र/वंश (decedents)
नीड़ - Nest
किस्लय - Bud

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