समय बड़ा बलवान
कैसे काटी शाम, ओ बंधु कैसे काटी शाम?
भीड़-भाड़ में मंत्र मुग्ध, मद में काटी शाम,
पल-पल भगा जाए रे, पकड़ो समय बड़ा बलवान।
कैसे खर्ची सारा दिन, ओ बंधु कैसे खर्ची शाम?
दिन चढ़ता देखा न मैने, भूल गया सब काम,
इधर-उधर की बातों में ही देखो, आ गई शाम।
खूब मनाई होली दिवाली, और करा विश्राम,
जीवन के उजियारों में भूल के चारों याम।
भूल के चारों याम, पथिक, मंजिल का भूले भान,
खूब चखी चकाचौंद दिन की, ओ बंधू खूब मनाई शाम।
रस से नीरस होता ये दिन, दुख-सुख का मिटा है भान,
धीरे-धीरे निशा की चादर ओढ़े, ढलती शाम।
क्या था करना क्या कर आए, सोचो आई रात,
दिन का पूरा लेखा-जोखा, देखे मुंदती आंख,
कैसे बीता ये सारा दिन, ऐसे आई रात।
पल भर में ये जाना कि है समय बड़ा बलवान।
दीप वेद
मार्च 3 2025