Thursday, May 26, 2016

पग चिन्ह

कुछ पग चिन्ह
रेत की स्याही से लिखे 
लम्बी गहरी यादों के
ये पल चिन्ह

आगे बड़ते बढ़ते 
चमकीली रेत पे 
कुछ गहरे कुछ उथले
ये पग चिन्ह

लहर अभी तक दूर थी 
दिन बस ढलने लगा 
संध्या तम से तीव्रता थी
अनभिज्ञ मन के झरोखों में

एक एक ज्वार भारी पड़ा
उथले गहरे प्रतिबिम्बों पे
सब चिन्हों का नाश हुआ
सब आलिंगन झूठे थे 

पैरों की गलियों में कहीं 
रेणु के कुछ पल अटक गए 
ना जाने क्यों इनको संजोये रखें हैं 
कुछ पल चिन्हों के पग चिन्ह


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