मुक्ति
मुक्ति के तट पर सँजोया
स्वप्न घृत दीपक,
माया आलिङ्गित बयार
रक्त सिंचित नर्क मदमय ।
मनु सन्तति विकार मनमें
काया मद और लोभ तन्मे,
भक्ति पोषित दम्भनीड़ मे
प्राण दीपक किस्लय ।
शब्दावली :
घृत - घी
सन्तति - पुत्र/वंश (decedents)
नीड़ - Nest
किस्लय - Bud