कल सुबह जब प्राण वायु
मन के तीर् पर आएगी ,
नव दिशा नव आकांक्षाएँ ,
नई सदी फिर लाएगी ।
पुर की शिक्षा ,
स्व् का निश्चय ,
कृतियों में बंध जायेगी।
प्रण व स्थिर मनोदश से ,
नई सदी बन जाएगी ।
नहीं किंचित संदेह मन में ,
हम वो सब कर जाएँगे ,
नया भारत , नया कुटुंब ,
इस वसुधा को बनाएँगे
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