Saturday, April 24, 2021

डर लगता है

ये पल थमूं या ना थामूं
डर लगता है 
तुम चले ना जाना

हवाएं थम सी जाती हैं
तूफानों के बीच में
कही तुम बह ना जाना, डर लगता है ।

मौसम बदल गया है
बहारें अब आती ही नहीं
अरसों से पतझड़ ही है यहां 
कहीं तुम टूट न जाना, डर लगता है ।

मैं तो बस मिट्टी हूं 
तुम ही दरख़्त की जड़ हो 
छोड़ के चले ना जाना 
डर लगता है ।

दीप वेद